अबश्य पढ़े और विचार करे ।।
हमारा भी तो ..पवित्र महीना ...आया था...21 अप्रैल से 21 मई तक उज्जैन महाकुम्भ! !!
करोडो लोग ...आये ..इकट्ठा हुये ..श्रद्धा की डुबकी लगाई...
ईश्वर को याद किया ...दर्शन किये ...
सब कुछ किया ....
लेकिन ... दूसरे धर्म के लोगों ..के प्रति बुरा विचार नही रखा...
बम विस्फोट, करना, कत्लेआम करना, गला रेतना तो दूर की बात....
उज्जैन में ...रामघाट और महाकालेश्वर मन्दिर को जाने वाला रास्ता ...शहर की खजूरवाली मस्जिद, नयापुरा से होकर गुजरता है...
करोडो लोग ...इन इलाकों से गुजरते रहे ...
मुस्लिमो की सारी दुकानें खुली रही ..चलती रही ..
लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई ...
बल्कि इनकी दुकानों पर श्रद्धालुओ की भीड लगी रही ..
और अब अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई , अमरनाथ धाम श्रीनगर से लगभग 135 किलोमीटर दूर है...अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। एक बालटाल से और दूसरा पहलगाम से जाता है, बालटाल से पवित्र गुफा का रास्ता 14 किलोमीटर का है जबकि पहलगाम से 51 किलोमीटर है, यात्री बालटाल से डोमेल, बरारी होते हुए बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं जबकि पहलगाम वाले यात्री चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंजतरनी होते हुए पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं.....
अभी तक साढ़े तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं....
अमरनाथ जाने का मार्ग मुस्लिम बाहुल्य हैं लाखो लोग जाएंगे लेकिन कही हिन्दुओ द्वारा कही उत्पात नहीं होता उल्टा रास्ते मैं पढ़ने वाली इनकी दुकानों पर श्रद्धालुओ की भीड लगी रहती हैं जिनसे इनकी जीविका चलती हैं....
वहीं दूसरी ओर....शुक्रवार को 20-25 भाई लोग ..इकट्ठे हो जाये ...
तो...विश्व विजय पे निकल पडते है...और सोचते है कि अब..पूरी दुनिया को हरा रंग के ही घर लौटेगें... और सबसे खास बात इनके पवित्र स्थान मक्का मदीना पर कोई गैर मुस्लिम नहीं जा सकता उसको कई सौ किलोमीटर पहले ही रोक दिया जाता हैं और वहां वकायदा बोर्ड भी लगा हैं यहाँ गैर मुस्लिमो का प्रवेश वर्जित हैं... जबकि हमारे यहाँ अमरनाथ मंदिर का पुजारी भी एक मुस्लिम हैं !!
ऐसे है हम सनातनी... इसलिए स्वय विचार कीजिये कौन सा धर्म शांति का सन्देश देता हैं...!!
हमारा भी तो ..पवित्र महीना ...आया था...21 अप्रैल से 21 मई तक उज्जैन महाकुम्भ! !!
करोडो लोग ...आये ..इकट्ठा हुये ..श्रद्धा की डुबकी लगाई...
ईश्वर को याद किया ...दर्शन किये ...
सब कुछ किया ....
लेकिन ... दूसरे धर्म के लोगों ..के प्रति बुरा विचार नही रखा...
बम विस्फोट, करना, कत्लेआम करना, गला रेतना तो दूर की बात....
उज्जैन में ...रामघाट और महाकालेश्वर मन्दिर को जाने वाला रास्ता ...शहर की खजूरवाली मस्जिद, नयापुरा से होकर गुजरता है...
करोडो लोग ...इन इलाकों से गुजरते रहे ...
मुस्लिमो की सारी दुकानें खुली रही ..चलती रही ..
लेकिन कोई अप्रिय घटना नहीं हुई ...
बल्कि इनकी दुकानों पर श्रद्धालुओ की भीड लगी रही ..
और अब अमरनाथ यात्रा शुरू हो गई , अमरनाथ धाम श्रीनगर से लगभग 135 किलोमीटर दूर है...अमरनाथ की पवित्र गुफा तक पहुंचने के दो रास्ते हैं। एक बालटाल से और दूसरा पहलगाम से जाता है, बालटाल से पवित्र गुफा का रास्ता 14 किलोमीटर का है जबकि पहलगाम से 51 किलोमीटर है, यात्री बालटाल से डोमेल, बरारी होते हुए बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं जबकि पहलगाम वाले यात्री चंदनवाड़ी, पिस्सू टॉप, शेषनाग और पंजतरनी होते हुए पवित्र गुफा तक पहुंचते हैं.....
अभी तक साढ़े तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु अमरनाथ यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन करवा चुके हैं....
अमरनाथ जाने का मार्ग मुस्लिम बाहुल्य हैं लाखो लोग जाएंगे लेकिन कही हिन्दुओ द्वारा कही उत्पात नहीं होता उल्टा रास्ते मैं पढ़ने वाली इनकी दुकानों पर श्रद्धालुओ की भीड लगी रहती हैं जिनसे इनकी जीविका चलती हैं....
वहीं दूसरी ओर....शुक्रवार को 20-25 भाई लोग ..इकट्ठे हो जाये ...
तो...विश्व विजय पे निकल पडते है...और सोचते है कि अब..पूरी दुनिया को हरा रंग के ही घर लौटेगें... और सबसे खास बात इनके पवित्र स्थान मक्का मदीना पर कोई गैर मुस्लिम नहीं जा सकता उसको कई सौ किलोमीटर पहले ही रोक दिया जाता हैं और वहां वकायदा बोर्ड भी लगा हैं यहाँ गैर मुस्लिमो का प्रवेश वर्जित हैं... जबकि हमारे यहाँ अमरनाथ मंदिर का पुजारी भी एक मुस्लिम हैं !!
ऐसे है हम सनातनी... इसलिए स्वय विचार कीजिये कौन सा धर्म शांति का सन्देश देता हैं...!!
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें