गुरुवार, 7 जुलाई 2016

अवसाद और युवा पीढ़ी

आज अवसाद अर्थात डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं विशेष रूप से युवा वर्ग डिप्रेशन का अधिक शिकार हो रहा है क्यों इसका कारण क्या है ? डॉक्टर चिकित्सक कुछ नहीं बोलते उनके पास कोई निष्कर्ष नहीं ट्रीटमेंट के नाम पर नींद की गोली देते हैं क्या नींद की गोली डिप्रेशन का उपचार है ? वस्तुतः यदि देखा जाए तो युवाओं में तेजी से बढ़ते जा रहे डिप्रेशन के क्या कारण है तो आप इस निष्कर्ष पर आएंगे की आज की भागदौड़ वाली जिंदगी में माता पिता अभिभावक अपने पाल्यों को महंगे स्मार्टफोन बाइक्स और सुख सुविधा के तमाम चीजें तो उपलब्ध करा देते हैं किन्तु अपने बच्चों के पास बैठकर प्यार के दो लम्हे व्यतीत कर लें उनसे बातें कर लें ऐसा वे नहीं कर पाते मनुष्य एक सामजिक प्राणी है जब कोई छोटा बच्चा अपनी आँखें खोलता है तो उसकी पहली शिक्षक होती है उसकी माँ उसका पहला मेंटर होता है उसका पिता किन्तु आज के परिदृश्य में जब हम देखते हैं तो ये परिलक्षित होता है आज आधुनिक गैजेट्स ही बच्चों के अभिभावक की भूमिका में हैं क्योंकी तथाकथित अभिभावक अपने दायित्वों के निर्वहन के प्रति उदासीन हैं या कहें की लापरवाह हैं जब बच्चा अपनी बातें अपनों से साझा नहीं कर पाता है तो वह बाहर की दुनिया के प्रति आकर्षित होता हैं जहाँ उसका सामना अच्छे बुरे हर तरीके के लोगों से होता है अपनी मनःस्थिति को कभी साझा न कर पाने के कारण युवा कुंठा से ग्रसित हो जाते हैं और यही उनके अवसाद का कारण बनता है इसलिए मैं अपने पाठकों से करबद्ध निवेदन करता हूँ आप अपने बच्चों को समय दें उनसे बातें करें उनकी बातें सुनें याद रखें यदि आपके बच्चों और आपके बीच सौहार्दपूर्ण एवम् पारदर्शी स्नेहपूर्ण रिश्ता है तो आपका बच्चा कभी अवसाद का शिकार नहीं होगा उसकी मानसिक मजबूती दूसरे बच्चों से कहीं बेहतर होगी ।  

आशुतोष स्नेहसागर मिश्रा 

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